दिव्य न्यूज़ 18:-आप सोचिए आप रोज काम पर जाते हैं और एक दिन अचानक बोल दिया जाए कि कल से काम पर नहीं आना है. तो आपके दिमाग में सबसे पहला सवाल क्या उठेगा? ये सोचना थोड़ा मुश्किल है क्योंकि काम करने वाले इंसान के पास हजारों खर्चे होते हैं- बच्चों की फीस, घर-गाड़ी की ईएमआई और बहुत कुछ. अगर आपको कंपनी नौकरी से निकाल देती है तो आपकी दुनिया यही नहीं खत्म होती बल्कि कई और रास्ते होते हैं, जो आपकी मदद करते हैं. जानिए- वो क्या हैं. छंटनी किसी बुरे सपने से कम नहीं होती है. नौकरी करते-करते हम एक कम्फर्ट जोन में आ जाते हैं. घर इस नौकरी से चलता है. बच्चे पढ़ने जाते हैं, कार-घर से लेकर ट्रैवल बजट सब इसी पर निर्भर होता है. लेकिन अगर आपको अंदाजा भी न हो और सुबह उठते ही आपके मेल पर छंटनी का मैसेज आ जाए तो कैसा लगेगा. यही न कि अरे हम तो कहीं के नहीं रहे. लेकिन ऐसा नहीं है. रास्ते पूरी तरह बंद कभी नहीं होते. हमेशा जब कोई रास्ता नहीं होता, तब कई रास्ते निकलते हैं. बस, आपको समझदारी और धैर्य से काम लेना होता है. अब आप सोचेंगे कि अचानक ये सवाल क्यों उठ रहा है कि नौकरी चली जाएगी. इसके पीछे लगातार आती वो खबरें हैं जिनमें कभी ओरेकल कंपनी ने 30 हजार की छंटनी कर दी. आईटी दिग्गज कॉग्नीजेंट 12,000 से 15,000 कर्मचारियों की छंटनी करने की तैयारी में है. इसी तरह वॉलमार्ट, माइक्रोसॉफ्ट जैसी कई कंपनियाें से भी ऐसी खबरें आ रही हैं. भले ही कंपनियों की अपनी मजबूरी हो, लेकिन इसमें जॉब जाने का सबसे बड़ा संकट हमारे देश के युवाओं के सामने है. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ये निकाले गए लोग आखिर जाएंगे कहां?सबसे पहले क्या करें?
सबसे पहले तो ये जरूरी है कि अगर व्यक्ति किसी जॉब में हैं तो कभी भी इस फियर में न रहे कि अगर जॉब चली गई तो मेरी जिंदगी में कुछ नहीं बचेगा. अगर हममें काबिलियत है तो उसकी वैल्यू भी है. भले ही जिस कंपनी में काम कर रहे थे, उनको इसकी जरूरत नहीं है तो इसका मतलब ये नहीं कि वो काबिलियत खत्म हो गई या बेकार हो गई. आप इसे दूसरे रास्तों में लगा सकते हैं.
निकाले गए लोगों के सामने क्या हैं विकल्प?
एक्सपर्ट्स और इंडस्ट्री ट्रेंड्स के अनुसार, इन कर्मचारियों के पास अब 3 मुख्य रास्ते हो सकते हैं.
मिड-कैप और स्मॉल आईटी फर्म्स: बड़ी कंपनियों से निकले अनुभवी टैलेंट को अब छोटी और मध्यम स्तर की कंपनियां कम पैकेज पर हाथों-हाथ ले रही हैं.
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs): भारत में विदेशी कंपनियों के अपने ऑफिस (GCCs) तेजी से बढ़ रहे हैं. ये केंद्र कॉस्ट कटिंग की जगह क्वालिटी टैलेंट पर ध्यान दे रहे हैं.
अपस्किलिंग और फ्रीलांसिंग: ऑटोमेशन के दौर में पुराने स्किल्स बेकार हो रहे हैं. निकाले गए लोग अब प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग और साइबर सिक्योरिटी जैसे कोर्सेज कर गिग इकोनॉमी का हिस्सा बन रहे हैं.
सबसे पहले नुकसान को समझें?
- अचानक सैलरी रुक जाना
- ईएमआई का बोझ
- करियर गैप और मेंटर स्ट्रेस
- परिवार का खर्च
ये फायदे भी हैं शामिल

