दिव्य न्यूज़ 18:-छत्तीसगढ़ में 1 मई से 10 जून तक ‘सुशासन तिहार 2026’ अभियान शुरू हो गया है, जिसके तहत सरकार लोगों के द्वार तक पहुंचकर उनकी समस्याओं का मौके पर ही समाधान करेगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में यह पहल राजस्व, मनरेगा और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मामलों को एक महीने के भीतर निपटाने पर केंद्रित है, जिससे प्रशासन जनता के करीब आ सके।मई की तपती दोपहर में छत्तीसगढ़ के गाँवों और शहरों में इस बार एक अलग ही हलचल है। लोग अब दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाएंगे, बल्कि सरकार खुद उनके दरवाजे तक पहुंचेगी। इसी सोच के साथ आज से “सुशासन तिहार 2026” की शुरुआत हो गई है। 1 मई से 10 जून तक चलने वाला यह अभियान पूरे प्रदेश में प्रशासन को सीधे जनता से जोड़ने का प्रयास है, जहाँ लोगों की समस्याएँ सुनी ही नहीं जाएंगी, बल्कि मौके पर ही समाधान देने की व्यवस्था भी की गई है। इस अभियान में है मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से लेकर कलेक्टर तक पूरा प्रशासन मैदान में उतरेगा। होम विज़िट और समाधान शिविरों के जरिए मौके पर ही फाइल तैयार होगी और वहीं तुरंत निपटारा भी किया जाएगा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अभियान को सुशासन की असली कसौटी बताते हुए स्पष्ट किया है कि समयबद्ध समाधान ही प्रशासन की प्राथमिक पहचान होना चाहिए। इसी दिशा में सभी कलेक्टरों को पहले ही निर्देश दिए गए थे कि 30 अप्रैल तक लंबित प्रकरणों का प्राथमिकता से निराकरण सुनिश्चित करें। इसमें नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन जैसे राजस्व मामलों के साथ-साथ मनरेगा की लंबित मजदूरी, आय-जाति-निवास प्रमाण पत्र, बिजली, ट्रांसफार्मर और पेयजल जैसी मूलभूत समस्याओं को विशेष रूप से शामिल किया गया है।अभियान के तहत अब जमीनी स्तर पर एक नई कार्यशैली देखने को मिलेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में 15 से 20 ग्राम पंचायतों के समूह में और शहरी क्षेत्रों में वार्ड क्लस्टर के आधार पर समाधान शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों में केवल आवेदन स्वीकार करने तक सीमित नहीं रहा जाएगा, बल्कि पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ मौके पर ही दिया जाएगा और प्रत्येक आवेदन का अधिकतम एक महीने के भीतर निराकरण सुनिश्चित किया गया है।