दिव्य न्यूज़ 18:-सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को सार्वजनिक और शैक्षणिक परिसरों में खाना खिलाने को लेकर कहा कि पशु प्रेमी कुत्तों को खाना खिला सकते हैं, लेकिन काटने की स्थिति में उन्हें कानूनी जिम्मेदारी लेनी होगी।
-
सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों को खाना खिलाने की अनुमति
-
कुत्तों के काटने पर खिलाने वालों को लेनी होगी जिम्मेदारी
NALSAR यूनिवर्सिटी के मामले में सुप्रीम कोर्ट का निर्देश नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के प्रबंधन को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और कड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि पशु प्रेमी, छात्र संगठन या एनिमल राइट्स ग्रुप सार्वजनिक और शैक्षणिक परिसरों में आवारा कुत्तों को खाना खिला सकते हैं और उनकी देखभाल भी कर सकते हैं, लेकिन इसके साथ ही उन्हें कुत्तों के काटने के कारण लोगों को होने वाली परेशानी की भी जिम्मेदारी उठानी होगी।
दरअसल, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने कहा पशु कल्याण समूह और छात्र संगठन शैक्षणिक संस्थानों के परिसरों में आवारा कुत्तों को अपनी जिम्मेदारी पर ही रखें या खाना दें। उनको इस बात तो स्वीकार करना होगा कि वहां कुत्ते के काटने की किसी भी घटना या उससे संबंधित नुकसान के लिए वे खुद कानूनी रूप से जिम्मेदार होंगे।
देना होगा हलफनामा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ऐसे जानवरों के अधिकार या हित, मानव जीवन और उनकी सुरक्षा की रक्षा से ऊपर नहीं हो सकते। शैक्षणिक संस्थानों में पशु कल्याण समूह या छात्र संगठन तभी आवारा कुत्तों को खाना खिला सकते हैं या उनकी देखभाल कर सकते हैं, जब वे परिसर में किसी भी डॉग-बाइट या संबंधित नुकसान की कानूनी जिम्मेदारी लेने का औपचारिक हलफनामा देंगे।
मामला?
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला हैदराबाद स्थित NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ की ओर से दाखिल आवेदन पर आया। NALSAR ने कोर्ट में कहा कि उसने अपने पशु विधि केंद्र के माध्यम से मानवीय आवारा कुत्ता प्रबंधन को संस्थागत रूप दिया है, जो छात्रों और कर्मचारियों को शामिल करते हुए नसबंदी, टीकाकरण और जागरूकता कार्यक्रम चलाता है। इस आवेदन के बाद सुप्रीम कोर्ट ने NALSAR के कैप्चर-स्टेरिलाइज-वैक्सीनेट-रिलीज (CSVR) मॉडल को प्रायोगिक आधार पर जारी रखने की अनुमति दी, लेकिन सख्त जवाबदेही की शर्तें लागू करने के बाद ही। सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि इस निर्देश का पालन नहीं होने पर संबंधित संस्थान प्रमुख के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।