छत्तीसगढ़ में शराब के शौकीनों को कांच की बोतल की जगह प्लास्टिक (फाइबर) की बोतल में शराब बेचने आबकारी का फंडा अब विभाग के लिए ही चुनौती साबित हो रहा है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में शराब के शौकीनों को कांच की बोतल की जगह प्लास्टिक (फाइबर) की बोतल में शराब बेचने आबकारी का फंडा अब विभाग के लिए ही चुनौती साबित हो रहा है। यह सौदा विभाग को काफी भारी पड़ रहा है। यही नहीं, देशी शराब बनाने वाली पांच डिस्टलरीज के लिए यह गले का फंदा बन गया है। हालत ये है कि शराब के उत्पादन में 65 फीसदी की कमी आ गई है और इतना ही नहीं, देशी के शौकीनों को उनकी पसंद का ब्रांड नहीं मिल पा रहा है। प्लास्टिक या कांच कौन सी बोतल सही है
कांच की बोतलें- कांच को पारंपरिक रूप से शराब के भंडारण के लिए सबसे सुरक्षित माना जाता है। कांच एक ‘अक्रिय’ सामग्री है, जिसका अर्थ है कि यह शराब के साथ कोई रासायनिक प्रतिक्रिया नहीं करता। इससे शराब का स्वाद और गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है। कांच ऑक्सीजन को अंदर आने और कार्बन डाइऑक्साइड (बीयर के मामले में) को बाहर जाने से पूरी तरह रोकता है, जिससे शराब खराब नहीं होती। कांच को अनंत बार रीसायकल किया जा पूरी तरह से ‘एयर-टाइट’ नहीं होता। समय के साथ इसमें से बहुत मामूली मात्रा में ऑक्सीजन अंदर जा सकती है, जिससे शराब का ऑक्सीकरण हो सकता है। प्लास्टिक के रीसाइक्लिंग की एक सीमा होती है और यह पर्यावरण के लिए अधिक हानिकारक माना जाता है। प्लास्टिक की बोतलों का नफा कम, नुकसान ज्यादा
प्लास्टिक की बोतल में शराब के फायदे की बात करें तो प्लास्टिक की बोतलें हल्की होती हैं जिससे इन्हें ले जाना आसान होता है और इनके टूटने का डर नहीं रहता। कांच की तुलना में इनका उत्पादन और परिवहन सस्ता पड़ता है। प्लास्टिक की बोतल के नुकसान भी देखिए। लंबे समय तक रखे रहने या तापमान बढ़ने पर प्लास्टिक से कुछ रसायन शराब में घुल सकते हैं, जो स्वाद और स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। प्लास्टिक कांच की तरह छत्तीसगढ़ क्षेत्र में भी एक अन्य चक्रवाती सिस्टम सक्रिय है। वहीं दक्षिण मध्य प्रदेश से झारखंड तक एक द्रोणिका छत्तीसगढ़ से होकर गुजर रही है।बॉटलिंग सिस्टम ही लड़खड़ाया
राज्य में आबकारी विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों ने हरिभूमि को बताया कि प्लास्टिक की बोतल में सप्लाई की व्यवस्था क्यों फेल हो रही। दर असल होता यह है कि डिस्टलरीज में शराब की बॉटलिंग का सिस्टम कांच की बोतलों में शराब भरने के हिसाब से बना है। इस सिस्टम में अब प्लास्टिक की बोतल रखकर भरने से वह वजन में हल्की होने के कारण बार-बार गिर जाती है। इसकी वजह से बॉटलिंग की क्षमता बुरी तरह प्रभावित हो रही है। इसे इस तरह समझा जा सकता है एक घंटे में अगर कांच की 100 बोतलें भरी जाती है तो प्लास्टिक की 20 बोतल ही भर पा रहे हैं। यही कारण है कि देशी की सप्लाई करने वाली डिस्टलरीज का 65 प्रतिशत उत्पादन ठप हो गया है। इस स्थिति के मद्देनजर दो दिन पहले ही आबकारी विभाग ने देशी शराब निर्माताओं की बैठक बुलाकर सप्लाई बढ़ाने कहा है। इस बीच विभाग ने सप्लाई लाइन को मजबूत करने के लिए निर्माताओं से ये भी कहा है कि वे 31 मई तक कांच की बोतल में ही सप्लाई करें।
ये है मामला
