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दिव्या न्यूज़ :-कोरबा मिनीमाता हसदेव बांगो बांध के नौ गेट पिछले 60 घंटे से लगातार खुले हुए हैं। 93.65 प्रतिशत जलभराव के बाद बांध में पानी का दबाव नियंत्रित करने के लिए 11 में नौ गेट खोले गए हैं। इनसे 48,828 क्यूसेक पानी प्रति सेकेंड की दर से हसदेव नदी में छोड़ा जा रहा है। लगातार पानी छोड़े जाने से हसदेव का जलप्रवाह तेज बना हुआ है और नदी किनारे के निचले क्षेत्रों में प्रशासन की निगरानी बढ़ा दी गई है।बांगो में इस बार मानसून की वर्षा ने जलभराव की स्थिति जल्दी बना दी। लंबे अंतराल बाद बांध के नौ गेट एक साथ खुले हैं। इससे पहले वर्ष 2014 के पूर्व बांध लबालब होने की स्थिति में 10 गेट खोलने पड़े थे। उस समय भी अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने के लिए बड़े स्तर पर पानी छोड़ा गया था। वर्तमान में बांगो के दो, तीन, चार, आठ, नौ और 10 नंबर गेट एक-एक मीटर, पांच और सात नंबर गेट डेढ़ मीटर तथा छह नंबर गेट दो मीटर खोला गया है। लगातार पानी छोड़ने से बांध के जलस्तर में करीब आठ सेंटीमीटर की कमी आई है।कार्यपालन अभियंता संतोष भारती ने बताया कि जलस्तर घट कर 92 प्रतिशत पहुंचेगा, तब गेट बंद किए जाएंगे। बांगो से छोड़े जा रहे पानी का असर दर्री बांध पर भी पड़ा है। दर्री के 14 में से चार गेट खोलकर हसदेव में पानी छोड़ा जा रहा है। इसके अलावा दायीं और बायीं तट नहर से 3,800 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। लगातार वर्षा के कारण हसदेव के साथ तान, अहिरन और लीलागर नदी तथा जिले के नालों में भी जलस्तर बढ़ा हुआ है। नदी तट से लगे खेत-खलिहानों में पानी भरने से कृषि कार्य प्रभावित हुआ है। जल संसाधन विभाग की ओर से लोगों को नदी और तेज जलप्रवाह वाले क्षेत्रों से दूर रहने की समझाइश दी जा रही है।
ऐसे तय होता है गेट खोलने का फैसला
बांध के गेट कितनी ऊंचाई तक खोले जाएं और कितना पानी छोड़ा जाए, इसका निर्णय पानी की आवक, मौजूदा जलस्तर, बारिश के अनुमान, जलाशय की क्षमता और नीचे नदी में पानी के प्रवाह को देखकर किया जाता है। गेट की बनावट और जलाशय में पानी की ऊंचाई के आधार पर पानी के प्रवाह का तकनीकी आकलन किया जाता है। बांगो परियोजना के कार्यपालन अभियंता संतोष भारती ने बताया कि 80,000 क्यूसेक तक पानी छोड़ने का अधिकार कार्यपालन अभियंता के पास रहता है। इससे अधिक पानी छोड़ने के लिए अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता से अनुमति लेनी होती है।
जांजगीर-चांपा और खरसिया में मंगलवार को दिखेगा असर
बांगो बांध से पानी छोड़े जाने का असर केवल कोरबा जिले तक सीमित नहीं रहता। हसदेव नदी आगे जांजगीर-चांपा जिले से होकर रायगढ़ जिले के खरसिया क्षेत्र की ओर बढ़ती है। इन क्षेत्रों में मंगलवार को असर देखने को मिलेगा। इसलिए बांध से पानी छोड़े जाने के बाद नदी के जलस्तर और बहाव पर इन क्षेत्रों में भी नजर रखी जा रही है।
खासकर नदी के किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों में पानी बढ़ने की स्थिति में प्रशासन सतर्क है। बांगो से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण हसदेव के प्रवाह में बढ़ोतरी का असर नदी के निचले हिस्सों में भी दिखाई देगा।

