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दिव्या न्यूज़ :-कोरबा खेतों में तेजी से विकसित हो रहे धान की फसल गभोट की स्थिति में आने लगी हैं। वर्षा थमते ही फसल में तना छेदक, झुलसन और खरपतवार का असर दिखाई देने लगा है। समय रहते निदान नहीं किए जाने पर पर फसल को नुकसान हो सकता है। फसल की सुरक्षा के लिए कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को सतर्क किया है। साथ ही खरपतवार को निकालने की सलाह दी है।वर्षा का साथ मिलने खरीफ वर्ष धान की बोआई और रोपाई के लिए किसानों को इस बार अधिक जद्दोजहद नहीं करनी पड़ी है। जिला कृषि विभाग ने खरीफ वर्ष 2026-27 के लिए धान बोआई का रकबा 90,000 हेक्टेयर रकबा निर्धारित किया है। इसमें रोपा के लिए 47,809 और बोता के लिए 43,691 हेक्टेयर रकबा था। अच्छी वर्षा की वजह से किसानों ने जहां 44,360 हेक्टेयर में रोपा विधि से खेती की है वहीं 47,352 हेक्टेयर में बोता विधि को अपनाया है।वर्षा के बाद धूप व उमस तेज होने से फसल में कीट व्याधि को पनपने मौका मिल गया है। वहीं पर्याप्त पानी भराव की वजह से खरपतावार की आशंका भी बढ़ गई है। कृषि विज्ञान केंद्र के फसल कीट रोग विशेषज्ञ का कहना है अभी धान फसल गभोट में है यानी बालियां निकलने के लिए तैयार हो रही है। यही वह अवस्था है जब धान में तना छेदक और बीएलटी यानी बैक्टिरियल लीफ ब्लाइट यानी झुलन की बीमारी फैलती हैँ।विशेषज्ञ का कहना है कि किसान तत्परता से खेतों से खरपतवार को निकालें और कीट रोग निदान के लिए कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क कर बीमारी उपचार के लिए दवाओं का छिड़काव करें। विशषज्ञ का यह भी कहना है कि खेतों में उगने वाले अनावश्यक पौधे को खरपतवार कहते हैं। यह पौधा धान के हिस्से के पोषक तत्व को मिट्टी से खींच लेता है। इस अनावश्यक पौधे को समय रहते नहीं निकाले जाने पर यह परिपक्व होकर धान के पौधे को कमजोर करता है। जिससे धान के पौधे में बीमारी से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है।
फसल कटाई के दौरान पैदावार कम होता है। समय रहते इसे उखाड़कर खेत से बाहर फेंकना जरूरी है। कुल्थी और तिल की बोआई में आई तेजी प्रथम चरण की खेती के बाद किसानाें ने कुल्थी और रामतिल की बोआई में तेजी आने लगी है।
कुल्थी जिसे ग्रामीण हिरवां भी कहते हैं की बोआई के लिए कृषि विभाग ने इस बार 2260 हेक्टेयर क्षेत्राच्छादन लक्ष्य रखा है। बीते वर्ष की तुलना में यह डेढ़ सौ हेक्टेयर अधिक है। कुल्थी दलहन प्रजाति का फसल है जिसका कम पानी में बेहतर उपज होता है। तिलहन फसल के लिए किसानों को रामतिल की बोआई के भी प्रेरित किया जा रहा है। प्रथम चरण की खेती के बाद किसान इस फसल की बोआई मेड़ों पर करते हैं। पूरक फसल होने की वजह से यह किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्त्रोत हैंँ।
सर्वाधिक वर्षा कोरबा तहसील में जिले में 15 जून से अब तक औसतन 839.2 मिली मीटर वर्षा हो चुकी है। बीते वर्ष की तुलना में यह आठ प्रतिशत अधिक है। अब तक हुई वर्षा का आकलन किया जाए तो सर्वाधिक 1057.1 मिलीमीटर कोरबा और सबसे कम 636.8 मिमी वर्षा हरदीबाजार तहसील में हुई। पर्याप्त सिंचाई सुविधा नहीं होने से जिले के अधिकांश किसान वर्षा आश्रित खेती करते हैं।
जारी वर्षा को देखते हुए कृषि विभाग उप संचालक डीपीएस कंवर कहना है खेतों में अनावश्यक पानी का भराव न होने देंँ। अधिक वर्षा होने की स्थिति में पानी निष्कासन के लिए मेड़ के बंधान को खुला रखें। फसलों को बीमारियों से बचाने के लिए विशेषज्ञों से जानकारी लेकर दवा का छिड़काव करें।
फसल रोग लक्षण दवा
तना छेदक गभोट का सूखना कार्टाफ हाइड्रोक्लाराइड का छिड़काव
बीएलटी झुलसा पत्तों का उपर तरफ से सूखना प्रति एकड़ 10 किलो पोटाश का छिड़काव
ब्लास्ट झुलसन पत्तों में नाव के आकार का धब्बा प्रोपीकोना जोल का छिड़काव
वर्जन
वर्षा थमने के बाद धान की फसल तेजी से विकसित हो रहा है। इस बीच तनाछेदक, बैक्टिरियल लीफ ब्लाइट यानी झुलसा व झुलसन जैसे फसल रोगो की आशंका बढ़ गई है। किसानों उपचार के लिए उपरोक्त दवाओं का छिड़काव कृषि विस्तार अधिकारी के सलाह से करें।
महिपाल उर्रे, कीट रोग विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्र कटघोरा

