दिव्य न्यूज़ 18:-एक नई स्टडी के अनुसार, कोरबा में मीडिया चाहे न्यूज़ चैनल या पोर्टल न्यूज़ चाहे टनकड़ न्यूज़ यें सारे सिर्फ बड़े नेता या सत्ता पछ की चापलूसी कर रहे है यें सारे लोग मंत्री जी का बखान कर रहे है इन लोगो की खबर कलेक्टर से लेकर मंत्री तक हीं सीमित रहती है |आप लोग चाहे तों सारे न्यूज़ का एनालिसिस कर सकते है |
लेकिन मजदूर वर्ग की परेशानी गर्मी का प्रकोप इससे किसी न्यूज़ पोर्टल चैनल कोई मतलब नहीं है लेकिन दिव्य न्यूज़ समय समय पर आप लोगो को अपने लेख से हीं सही जानकारी देना चाह रहा है ||भारत के कई शहरों में घर अब ‘हीट ट्रैप’ बन चुके हैं, जहां रात का तापमान 35°C तक पहुंच रहा है. कंक्रीट की दीवारें और हाई ह्यूमिडिटी आपकी सेहत बिगाड़ रही है. जानें क्यों रात में भी घर ठंडे नहीं हो रहे और बिना एसी कमरे को ठंडा रखने के लिए आप क्या कर सकते हैं.गर्मियों में तपती धूप की गर्मी से बचने के लिए लोग अक्सर घर के अंदर भागते हैं. उन्हें बाहर निकलने से बेहतर घर में रहना लगता है. अगर आप भी घर में रहने को सुरक्षित मानते हैं, तो आपके लिए एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है
. एक नई स्टडी में खुलासा हुआ है कि भारत के कई शहरों में घरों के अंदर का तापमान रात के समय भी इतना ज्यादा रहता है कि लोगों को गर्मी से ठीक से राहत ही नहीं मिल पाती. हालत ये है कि कई घरों में सर्दियों के दिनों में भी रात का तापमान 31 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं जाता है, जबकि गर्मी के महीनों में ये 35 डिग्री तक पहुंच जाता है.रात में क्यों बढ़ जाती है घरों की गर्मी?
स्टडी के अनुसार सबसे ज्यादा चिंता की बात ये है कि घर दिन में ही गर्म नहीं हो रहे, बल्कि रात में भी तपते रहे हैं. गौर करने वाली बात ये थी कि रात के समय भी गर्मी कम नहीं हुई. तापमान रात 8 से 9 बजे के बीच सबसे ज्यादा रिकॉर्ड किया गया, जो करीब 34.7°C तक पहुंच गया था. एक्सपर्ट्स के मुताबिक दिनभर धूप और गर्मी को सोखने वाली कंक्रीट की दीवारें और फर्श रात में धीरे-धीरे वही गर्मी छोड़ते हैं. इसी वजह से घर देर रात तक तपते रहते हैं. यहां तक कि सुबह के शुरुआती घंटों में भी तापमान 33.8°C से 34°C के बीच बना रहता है.रिपोर्ट में कहा गया कि घरों के अंदर तापमान में पूरे दिन बहुत कम उतार-चढ़ाव देखने को मिला, यानी लोगों को किसी भी समय ठंडक महसूस नहीं हुई
. ये लगातार बनी रहने वाली गर्मी शरीर को रिकवर होने का मौका नहीं देती है.रिसर्च में ये भी सामने आया कि लोगों की इनकम के आधार पर गर्मी से लड़ने की क्षमता भी अलग-अलग थी. जिन लोगों की तनख्वाह ज्यादा थी उनके घरों में एसी मौजूद था. वहीं जिनकी सैलरी कम थी उनके घरों में गर्मी से राहत पाने के लिए लोग सिर्फ पंखे पर निर्भर थे.
हालांकि रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि एसी भी तपते घरों का समाधान नहीं है, क्योंकि आरसीसी और कंक्रीट की इमारतें पूरे दिन गर्मी जमा करके रखती हैं. एसी बंद होते ही घर फिर से गर्म महसूस होने लगता है.
क्यों ज्यादा गर्म हो रहे हैं भारतीय घर?
एक्सपर्ट्स ने घरों के इस तरह गर्म होने के पीछे तीन मुख्य कारण बताए हैं.
1. कंक्रीट और ईंटों का इस्तेमाल: भारतीय शहरों में ज्यादातर घर ईंट और आरसीसी से बनाए जाते हैं. ये दोनों चीजें धूप की गर्मी को तेजी से सोख लेती हैं और धीरे-धीरे छोड़ती हैं.
2. खराब वेंटिलेशन: छोटे घरों और ज्यादा आबादी वाले इलाकों में वेंटिलेशन सही नहीं रहता है, जिसकी वजह से गर्मी अंदर फंसी रहती है.
3. ज्यादा आबादी और कम हरियाली: शहरों में पेड़-पौधे कम और कंक्रीट ज्यादा होने से आसपास का वातावरण भी ज्यादा गर्म हो जाता है. अहमदाबाद और हैदराबाद में हुई पिछली रिसर्च में भी पाया गया था कि कई घरों का रात का तापमान बाहर के मुकाबले 2 से 5 डिग्री ज्यादा था.
रिपोर्ट में बताया गया कि रात के समय ज्यादा गर्मी सिर्फ बेचैनी ही नहीं, बल्कि सेहत के लिए खतरा भी बन सकती है.
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26-28°C से ऊपर

तापमान होने पर स्लीप क्वालिटी खराब होने लगती है.
- 30°C से ज्यादा तापमान लगातार रहने पर शरीर पर स्ट्रेस बढ़ता है.
- इससे थकान, डिहाइड्रेशन, चिड़चिड़ापन और हार्ट संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है.
बिना एसी के घर को ठंडा रखने के आसान तरीके
अगर आपके घर में एसी नहीं है, तो कुछ आसान उपायों से घर की गर्मी काफी हद तक कम की जा सकती है.
दिन में खिड़कियां और पर्दे बंद रखें: अगर आप अपने घर को ठंडा रखना चाहते हैं तो दोपहर के समय कुछ चीजें करना बहुत जरूरी है. दोपहर की सीधी धूप घर को तेजी से गर्म करती है. ऐसे में मोटे पर्दे या ब्लैकआउट कर्टेन लगाने से तापमान कम हो सकता है.
रात में क्रॉस वेंटिलेशन करें: रात को दोनों तरफ की खिड़कियां खोल दें ताकि वेंटिलेशन बने और गर्म हवा बाहर निकल सके.
छत को ठंडा रखें: छत पर सफेद पेंट, मिट्टी के गमले या ग्रीन नेट लगाने से वो गर्मी कम सोखती है. कई लोग छत पर पानी का हल्का छिड़काव भी करते हैं.




