दिव्य न्यूज़ 18:-सूर्य के मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करने के साथ ही मांगलिक कार्यों में लगी रोक समाप्त हो जाएगी। 14 अप्रैल को मेष संक्राति से खरमास समाप्त हो जाएगा और विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे शुभ संस्कारों की शुरुआत हो जाएगी।19 अप्रैल से 29 जून तक विवाह के लिए कुल 23 मुहूर्त हैं। वहीं तृतीया और चतुर्थी की तिथि पड़ने से अक्षय तृतीया का पर्व 20 अप्रैल को मनाया जाएगा। इस दिन अबूझ मुहूर्त होने के कारण किसी भी शुभ कार्य के लिए अलग से मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती है।
मेष संक्रांति का महत्व और सूर्य उपासना
ज्योतिषाचार्य पंडित जगदीश शर्मा ने बताया कि 14 अप्रैल को मनाई जाने वाली मेष संक्रांति का विशेष महत्व है। ज्योतिषशास्त्र में सूर्य को आत्मा, ऊर्जा और जीवन शक्ति का कारक माना जाता है। जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करते हैं तो इसे उसकी उच्च राशि माना जाता है। इस कारण इस संक्रांति का पुण्य भी अधिक फलदायी माना जाता धार्मिक मान्यता है कि इस दिन स्नान, दान और सूर्य की उपासना करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, आत्मबल और आरोग्य की प्राप्ति होती है। मेष संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान, तांबे के पात्र से सूर्य को अर्घ्य देना, गेहूं, गुड़, लाल वस्त्र, तांबा और मसूर दाल का दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
17 मई से 15 जून तक अधिक मास
पंडित जगदीश शर्मा ने बताया कि 17 मई से 15 जून तक अधिक मास रहेगा, जिसके चलते करीब एक माह तक विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों पर विराम रहेगा। इसी कारण अक्षय तृतीया से पहले और इसी दिन बड़ी संख्या में विवाह समारोह आयोजित किए जाएंगे। इन तीन माह में विवाह समारोहों की भरमार रहेगी।
विवाह के लिए शुभ मुहूर्त
अप्रैल माह में 19, 20, 21, 25, 27, 28, 29 तारीख को विवाह के मुहूर्त बन रहे हैं। मई में 1, 3, 5, 6, 7, 8, 13 और 14 को विवाह मुहूर्त हैं। वहीं जून में 21, 22, 23, 24, 25, 26, 27 और 29 जून को विवाह के शुभ संयोग बन रहे हैं।

