दिव्या न्यूज़ :-कोरबा में जमनीपाली स्थित मोहनम बिग बाजार के प्रोपराइटर मोहन जैन और सुरेंद्र जैन को पैक्ड सूजी मिसब्रांड मामले में राहत नहीं मिली है। डिस्ट्रिक्ट ट्रिब्यूनल कोर्ट ने कटघोरा न्यायालय के फैसले को सही ठहराते हुए आरोपियों की अपील खारिज कर दी है। कोर्ट ने 3 लाख रुपये की पेनाल्टी को बरकरार रखा है।खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने कुछ समय पहले मोहनम बिग बाजार जमनीपाली में औचक निरीक्षण किया था। जांच के दौरान दुकान में बिक रही पैक्ड सूजी मिसब्रांड पाई गई थी। लेबलिंग और पैकेजिंग के नियमों का उल्लंघन होने पर विभाग ने 4 आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया था। मामले की सुनवाई कटघोरा न्यायालय में हुई। सुनवाई के बाद कोर्ट ने प्रत्येक आरोपी पर 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। इस तरह कुल 12 लाख रुपये की पेनाल्टी लगाई गई थी।कटघोरा कोर्ट के फैसले से असंतुष्ट होकर आरोपियों ने बिलासपुर हाईकोर्ट और डिस्ट्रिक्ट ट्रिब्यूनल कोर्ट में अपील दायर की थी।
आरोपियों का कहना था कि उन पर लगाई गई पेनाल्टी की राशि बहुत ज्यादा है और फैसले पर पुनर्विचार किया जाए।डिस्ट्रिक्ट ट्रिब्यूनल कोर्ट की जज ममता भोजवानी ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपील खारिज कर दी। उन्होंने अपने फैसले में अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत न्यायालय को प्रत्येक आरोपी पर 3 लाख रुपये तक की पेनाल्टी लगाने का अधिकार है। इस दृष्टिकोण से कटघोरा न्यायालय द्वारा लगाई गई पेनाल्टी कम ही है, ज्यादा नहीं। इसलिए 3 लाख की पेनाल्टी पूरी तरह उचित और सही है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मिसब्रांडिंग जैसे मामले सीधे जनस्वास्थ्य से जुड़े हैं। ऐसे मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती। उपभोक्ताओं को गलत जानकारी देकर या मानकों के विपरीत खाद्य सामग्री बेचना गंभीर अपराध है। इसलिए सख्त कार्रवाई जरूरी है।ट्रिब्यूनल कोर्ट ने कटघोरा न्यायालय के फैसले को यथावत रखते हुए आरोपियों की अपील खारिज कर दी है। अब आरोपियों को 3 लाख रुपये की पेनाल्टी राशि जमा करनी होगी। खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने कहा कि मिलावट और मिसब्रांडिंग के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए विभाग सख्त कदम उठा रहा है। दुकानों की नियमित जांच की जा रही है।

