दिव्य न्यूज़ 18:-रायपुर : मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के चलते भारत में ईंधन संकट जैसी स्थिति बनने लगी है। ऐसे समय में एथेनॉल को पेट्रोल के प्रभावी विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार ने वर्ष 2020 में एथेनॉल उत्पादन बढ़ाने के लिए 29 कंपनियों के साथ समझौता किया था। योजना थी कि करीब 5,000 करोड़ रुपये के निवेश से राज्य में हर साल 100 करोड़ लीटर एथेनॉल उत्पादन क्षमता विकसित की जाएगी। हालांकि, छह साल बाद भी यह लक्ष्य पूरी तरह हासिल नहीं हो सका है।दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर के मुताबिक, जांच में सामने आया है कि 29 प्रस्तावित परियोजनाओं में से केवल 6 कंपनियों ने उत्पादन शुरू किया, जिनमें से 2 प्लांट कच्चा माल महंगा होने के कारण बंद हो गए। फिलहाल राज्य में केवल 4 एथेनॉल प्लांट संचालित हैं, जिनसे सालाना लगभग 33 करोड़ लीटर एथेनॉल का उत्पादन हो रहा है।
हालांकि, वर्तमान उत्पादन से राज्य की जरूरत पूरी हो रही है और करीब 7 करोड़ लीटर एथेनॉल दूसरे राज्यों को भी भेजा जा रहा है, लेकिन यदि सभी प्रस्तावित प्लांट शुरू हो जाते, तो छत्तीसगढ़ हर साल 100 करोड़ लीटर एथेनॉल उत्पादन कर देश को बड़ी आपूर्ति दे सकता था। अभी भी राज्य में करीब 65 करोड़ लीटर अतिरिक्त उत्पादन की संभावना बनी हुई है।राज्य में वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 36.35 लाख लीटर पेट्रोल की खपत होती है। पेट्रोलियम कंपनियां एथेनॉल खरीदकर पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक मिश्रण कर रही हैं। इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने और विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिल रही है।विशेषज्ञों के अनुसार, एथेनॉल पेट्रोल की तुलना में सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल ईंधन है। यह गन्ना, मक्का और खराब अनाज जैसे कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (ई-20) से ईंधन लागत घटाने के साथ-साथ ग्रीन फ्यूल को बढ़ावा मिल रहा है।छत्तीसगढ़ में बेमेतरा, रायपुर, दुर्ग, मुंगेली, कवर्धा, बिलासपुर, महासमुंद और रायगढ़ समेत कई जिलों में एथेनॉल प्लांट स्थापित किए जाने की योजना है। वर्तमान में हयाती ब्रेवरेज, बजरंग केमिकल डिस्टिलरी और मोदी बायोटेक जैसी कंपनियां उत्पादन कर रही हैं।छत्तीसगढ़ पेट्रोल-डीजल एसोसिएशन के अध्यक्ष अखिल धगट का कहना है कि आने वाले समय में और प्लांट शुरू होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि एथेनॉल का उत्पादन देश में ही होने से विदेशी मुद्रा की बचत होगी और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।