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दिव्या न्यूज़ :-कोरबा: जिले भर में एक जून से अब तक औसतन 685.2 मिमी वर्षा हो चुकी। बीते वर्ष की तुलना में यह खेती के लिए आवश्यक वर्षा से यह चार प्रतिशत अधिक है। सामान्य वर्षा व रोपा-बीयासी के साथ जिले भर में प्रथम चरण की खेती पूरी हो गई है। किसानों को अब खेतों में खरपतवार की चिंता सताने लगी है। कृषि विभाग के अनुसार समय रहते नहीं निकाले जाने पर फसल के लिए बीमारी का कारण बन सकता है। निवारण के लिए किसानाें ने निंदाई शुरू कर दी है।अनुकूल वर्षा से कृषि कार्य में उत्तरोत्तर प्रगति देखी जा रही है। किसानों ने अब मैदानी खेतों में मूंगफली, मक्का, उड़द व मूंग की बोआई शुरू कर दी है। अनुमान लगाया जा रहा है जारी मानसून खरीफ फसल के लिए बेहतर होगी। जिन किसानों ने पहले से सूखा बुआई कर ली थी उनके लिए थम-थम कर हो रही वर्षा सहयोगी साबित हुआ है। थरहा की तैयारी के लिए बुआई देर से ही सही पर उपयुक्त साबित हुआ है। पानी ठहराव वाले खेतों में थरहा लगाने के बाद अब किसान जल संरक्षण की तैयारी में लगे है।बीयासी का काम भी लगभग पूरा हो चुका है। जारी मानसून में तहसीलवार का आकलन किया जाए तो औसतन सभी तहसीलों में वर्षा में समानता है। इसके पहले वर्षों में खंड वर्षा से अलग- अलग स्थानों में खेती में विपरीत असर देखा गया था। एक जून से अब तक वर्षा का आकलन किया जाए तो सबसे अधिक वर्षा दर्री तहसील में 808.5 मिमी हुई है। इसके विपरीत सबसे कम 536.5 मिमी वर्षा अजगरबहार में दर्ज किया गया है।बताना होगा कि जिले में सिंचित रकबा 48 प्रतिशत होने के कारण धान फसल की कटाई के बाद अधिकांश खेतों मे किसान ग्रीष्म फसल नहीं ले पाते। मानसून आधारित खेती से किसानों को मुक्ति नहीं मिली है। सिंचाई रकबा में वृद्धि किए जाने की आवश्यकता है। बहरहाल खरीफ में प्रथम चरण की खेती तो हो चुकी है वहीं जिन किसानों ने अगस्त के शुरूआत में ही रोपाई पूरा कर लिया है उनके खेतों में खरपतवार का असर देखा जा रहा है।जिला कृषि विभाग की ओर से पनपने से पहले खरपतवार को निकालने की सलाह किसानों को दी जा रही है। साथ किसानों से कहा जा रहा है कि खेत में पानी का अनावश्यक भराव ना होने दें।दलहन की बुआई के लिए क्षेत्राच्छादन लक्ष्य 13,930 हेक्टेयर किया गया है जो पिछले वर्ष की अपेक्षा 1351 हेक्टेयर अधिक है। बुआई के लिहाज से सहकारी संस्थाओं में दोनों फसलों के लिए मात्र 25 क्विंटल बीज का भंडारण किया गया है। धान के बजाए अन्य फसल को कृषि विभाग की ओर से प्रेरित किया जा रहा है। विभाग की ओर से 400 एकड़ में प्रदर्शन खेती की गई है। अनाज, दलहन व तिलहन के अलावा किसान कोदो व कुल्थी जैसे फसल का लाभ लेने लगे हैं। धान की कीमत बढ़ने की वजह अधिकांश किसान अब सुगंधित के बजाए मोटा धान की खेती कर रहे हैं।
तैयार होने लगी बाड़ी में सब्जियां
बेहतर वर्षा के साथ जहां खेतों रोपा बियासी का काम पूरा हुआ है वहीं अब किसान अपने बाड़ी में सब्जी फसल के पर्याप्त समय दे पा रहे हैं। बाड़ियाें में करेला, तरोई, बैगन, खीरा खास तौर पर टमाटर फसल तैयार होने लगे है। जिला उद्यानिकी विभाग की ओर से किसानों को सब्जी की सामूहिक व तकनीकी खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा।अनाज की तुलना में सब्जी नकद फसल होने की वजह से स्थानीय किसानों में खेती को लेकर रूचि देखी जा रही है। अब तक हुई वर्षा पर नजर
- अजगरबहार- 536.5
- कोरबा- 760:4
- भैसमा- 626.4
- करतला- 657.3
- कटघोरा- 696.6
- दर्री- 808.5
- पाली- 743.0
- हरदीबाजार- 560.0
- पोड़ी उपरोड़ा- 689.4
- पसान- 662.2 {अनुकूल वर्षा के चलते धान के प्रथम चरण की खेती लगभग पूरी हो चुकी है। लगातार हो रही वर्षा को देखते हुए किसानों को सलाह दी जा रही कि खेतों में पानी का अनावश्यक भराव ना होने दे। समय रहते खरपतवार को खेतों से निकालें। बीमारी का लक्षण दिखने विभागीय अधिकारियों से सलाह लेकर दवा का छिड़काव करें। } {डीपीएस कंवर, सहायक संचालक,} कृषि}विज्ञापन,,,,,


