मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ का स्वास्थ्य क्षेत्र तेजी से नए आयाम हासिल कर रहा है। राज्य सरकार ‘स्वस्थ छत्तीसगढ़, विकसित छत्तीसगढ़’ के संकल्प के साथ चिकित्सा अधोसंरचना को मजबूत करने, आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करने और चिकित्सा शिक्षा को नई दिशा देने के लिए लगातार बड़े फैसले ले रही है। मेडिकल कॉलेजों की स्थापना से लेकर डिजिटल डायग्नोस्टिक सेवाओं, सुपर स्पेशलिटी स्वास्थ्य संस्थानों और दूरस्थ क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहलें की गई हैं।CM साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में मेडिकल कॉलेज, अटल आरोग्य लैब, मेडिसिटी, कैंसर संस्थान और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से स्वास्थ्य अधोसंरचना को नई गति मिली है।
स्वस्थ छत्तीसगढ़ की नई तस्वीर : CM साय के नेतृत्व में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को मिली रफ्तार, मेडिकल कॉलेजों से मेडिसिटी तक कई बड़े बदलाव
CM साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य अधोसंरचना को मिल रही नई गति (AI-Generated Image)
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ का स्वास्थ्य क्षेत्र तेजी से नए आयाम हासिल कर रहा है। राज्य सरकार ‘स्वस्थ छत्तीसगढ़, विकसित छत्तीसगढ़’ के संकल्प के साथ चिकित्सा अधोसंरचना को मजबूत करने, आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करने और चिकित्सा शिक्षा को नई दिशा देने के लिए लगातार बड़े फैसले ले रही है। मेडिकल कॉलेजों की स्थापना से लेकर डिजिटल डायग्नोस्टिक सेवाओं, सुपर स्पेशलिटी स्वास्थ्य संस्थानों और दूरस्थ क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहलें की गई हैं।
पांच नए मेडिकल कॉलेजों से चिकित्सा शिक्षा को मिलेगा नया विस्तार
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने जुलाई 2026 में राज्य के पांच नए शासकीय मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी प्रदान की। ये कॉलेज गीदम (दंतेवाड़ा), कुनकुरी (जशपुर), मनेंद्रगढ़, जांजगीर-चांपा और कबीरधाम में स्थापित किए जा रहे हैं। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रत्येक कॉलेज में 50-50 एमबीबीएस सीटों के साथ प्रवेश प्रारंभ होगा, जिससे राज्य में एक साथ 250 नई मेडिकल सीटें जुड़ेंगी। जशपुर के कुनकुरी मेडिकल कॉलेज के लिए राज्य सरकार पहले ही ₹359 करोड़ की सैद्धांतिक स्वीकृति दे चुकी है। राज्य में अब मेडिकल शिक्षा हिंदी माध्यम में भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे ग्रामीण और हिंदी भाषी विद्यार्थियों को चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने में सुविधा मिलेगी।मेडिसिटी हब और आधुनिक कैंसर संस्थान से मजबूत होगा स्वास्थ्य ढांचा
राज्य सरकार स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार पर लगातार निवेश कर रही है। हाल ही में ₹103 करोड़ से अधिक की स्वास्थ्य परियोजनाओं का भूमिपूजन एवं लोकार्पण किया गया। नवा रायपुर में प्रस्तावित ‘मेडिसिटी हब’ के अंतर्गत 5,000 बेड का विश्वस्तरीय सुपर स्पेशलिटी अस्पताल विकसित करने की योजना तैयार की गई है। इसी क्रम में रायपुर में अत्याधुनिक PET Scan, आधुनिक CT Scan तथा एडवांस्ड कीमोथेरेपी सुविधाओं से लैस 200 बेड का समर्पित कैंसर संस्थान भी संचालित किया जा रहा है, जिससे राज्य के मरीजों को बाहर जाने की आवश्यकता कम हुई है।अटल आरोग्य लैब: गांव-गांव तक मुफ्त जांच सुविधा
ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण जांच सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 13 अप्रैल 2026 को सुकमा से राज्यव्यापी ‘अटल आरोग्य लैब’ योजना की शुरुआत की। इस योजना के तहत नागरिकों को 133 प्रकार की पैथोलॉजी जांचें निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। HLL लाइफ केयर लिमिटेड के सहयोग से संचालित यह नेटवर्क वर्तमान में राज्य के 1,046 स्वास्थ्य संस्थानों में कार्यरत है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट सीधे मरीज के मोबाइल पर SMS और WhatsApp के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती है, जिससे समय और खर्च दोनों की बचत हो रही है।बस्तर और जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का व्यापक विस्तार
मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान के माध्यम से जुलाई 2026 तक बस्तर संभाग के 34 लाख से अधिक लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें आवश्यक उपचार एवं दवाएं उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। वहीं, ‘नियद नेल्लानार 2.0’ योजना के अंतर्गत बस्तर के 5,542 गांवों में आयुष्मान भारत कार्ड, जनधन खाते और सार्वजनिक वितरण प्रणाली का शत-प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। राज्य सरकार ने बस्तर या रायपुर में राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) की स्थापना का प्रस्ताव भी केंद्र सरकार के समक्ष रखा है।गुणवत्ता आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को मिली राष्ट्रीय पहचान
राज्य के कई प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) प्रमाणन प्राप्त हुआ है। दंतेवाड़ा के अरनपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के चनाडोंगरी आयुष्मान आरोग्य मंदिर तक अनेक संस्थानों को यह सम्मान मिला है। इससे स्पष्ट होता है कि दूरस्थ क्षेत्रों में भी स्वच्छता, सुरक्षित प्रसव, दवा उपलब्धता और मरीजों की देखभाल राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो रही है।संवेदनशील स्वास्थ्य व्यवस्था और सामाजिक पुनर्वास पर विशेष जोर
राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को केवल इलाज तक सीमित न रखकर सामाजिक पुनर्वास को भी प्राथमिकता दे रही है। ‘परियोजना सहारा’ के तहत ₹3.58 करोड़ की लागत से दिव्यांगजनों को आधुनिक सहायक उपकरण, कृत्रिम अंग और मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई गई हैं। साथ ही राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के संविदा कर्मचारियों की लंबित मांगों पर निर्णय लेते हुए उनकी हड़ताल अवधि का रुका हुआ वेतन जारी किया गया, जिससे स्वास्थ्य कर्मियों का मनोबल बढ़ा है।आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं से बदलती तस्वीर
स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार, चिकित्सा शिक्षा में निवेश, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं, आधुनिक चिकित्सा संस्थानों और दूरस्थ क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के माध्यम से छत्तीसगढ़ तेजी से मजबूत सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य का स्वास्थ्य मॉडल अधोसंरचना विकास, तकनीकी नवाचार और समावेशी स्वास्थ्य सेवाओं का संतुलित उदाहरण प्रस्तुत करता है।

