दिव्या न्यूज़ :-छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सरकारी योजनाओं में पात्रता के लिए सरपंच का निवास प्रमाण पत्र मान्य नहीं है, इसके लिए तहसीलदार का मूल निवासी प्रमाण पत्र होना अनिवार्य है। कोर्ट ने डेयरी योजना के एक मामले में याचिकाकर्ता को वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने और संबंधित विभाग को 3 माह में निर्णय लेने का निर्देश दिया है।बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी शासकीय योजना का लाभ लेने के लिए ग्राम पंचायत के सरपंच द्वारा जारी निवास प्रमाण पत्र वैध दस्तावेज नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि छत्तीसगढ़ का मूल निवासी होने का प्रमाण केवल तहसीलदार अथवा राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी मूल निवासी प्रमाण पत्र से ही सिद्ध होगा। न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू की एकलपीठ ने रायपुर निवासी जसपाल सिंह द्वारा दायर याचिका का निपटारा करते हुए यह आदेश पारित किया।याचिकाकर्ता ने राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना के तहत 50 प्रतिशत सब्सिडी के लिए आवेदन किया था। उन्होंने बैंक आफ महाराष्ट्र से 12 लाख रुपये का ऋण लेकर डेयरी फार्म स्थापित किया था, लेकिन आवश्यक दस्तावेजों में कमी के कारण सब्सिडी स्वीकृत नहीं हो सकी। इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान राज्य शासन ने बताया कि योजना का लाभ केवल छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों को दिया जा सकता है।
पात्रता का निर्धारण निर्धारण नियमों के अनुसार होगा
अदालत ने कहा कि शासकीय योजनाओं में पात्रता का निर्धारण निर्धारित नियमों के अनुसार ही किया जाएगा और इसके लिए तहसीलदार अथवा अधिसूचित सक्षम अधिकारी द्वारा जारी मूल निवासी प्रमाण पत्र ही मान्य होगा। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह विभाग के समक्ष अपना वैध मूल निवासी प्रमाण पत्र एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करे। इसके बाद संयुक्त संचालक, पशु चिकित्सा सेवा, रायपुर कानून के अनुरूप उसके सब्सिडी दावे पर विचार कर दस्तावेज प्राप्त होने की तारीख से तीन माह के भीतर अंतिम निर्णय लें।

