दिव्या न्यूज़ :-प्राकृतिक आपदाओं और अनिश्चित मौसम की मार से फसलों को बचाने के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ उठाने के लिए अब केवल 31जुलाई समय शेष है।प्राकृतिक आपदाओं और अनिश्चित मौसम की मार से फसलों को बचाने के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ उठाने के लिए अब केवल 31जुलाई का समय शेष है। जिले के किसान आगामी 31 जुलाई 2026 तक अपनी खरीफ फसलों का बीमा करा सकते हैं। इस वर्ष जिले में धान (सिंचित व असिंचित) और मक्का की फसल को अधिसूचित किया गया है। कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि योजना का लाभ ऋणी व अऋणी किसानों के साथ-साथ भू-धारक, बटाईदार और वनपट्टाधारी कृषक भी उठा सकते हैं।मौसम विज्ञानियों के अनुसार इस साल अल-नीनो के असर से मानसून की अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे सूखा, अतिवृष्टि या लंबे अंतराल तक बारिश न होने जैसी स्थिति बन सकती है। ऐसे जोखिम से निपटने के लिए फसल बीमा किसानों के लिए सबसे बड़ा ढाल है। योजना के तहत बुवाई न हो पाने, रोपाई में विफलता, स्थानीय प्राकृतिक आपदाओं और फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान की भी भरपाई की जाती है। किसी भी आपदा की स्थिति में किसान 72 घंटे के भीतर केंद्र सरकार के टोल फ्री नंबर 14447 पर सूचना देकर सीधे मुआवजा दावा प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।
ऋणी और अऋणी किसान ऐसे कराएं पंजीयन
जिन किसानों ने केसीसी या कृषि ऋण लिया है, वे अपनी सेवा सहकारी समिति या बैंक शाखा से संपर्क कर पंजीयन करा सकते हैं। वहीं अऋणी किसान नजदीकी लोक सेवा केंद्र, बीमा कंपनी के प्रतिनिधि या सीधे पीएम फसल बीमा पोर्टल के जरिए आनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
अऋणी किसानों के लिए ये दस्तावेज हैं अनिवार्य
बिना ऋण वाले किसानों को बीमा कराने के लिए आधार कार्ड, बैंक पासबुक की छायाप्रति, जमीन संबंधी दस्तावेज (बी-1 व पी-2) तथा फसल विवरण का स्व-घोषणा पत्र जमा करना होगा। किसान अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से भी मदद ले सकते हैं।
गत वर्ष बाहर हुए किसान भी दोबारा उठा सकते हैं लाभ
विभाग ने विशेष रूप से उन किसानों से भी बीमा कराने का आग्रह किया है, जिन्होंने बीते वर्ष असहमति आवेदन देकर योजना से दूरी बना ली थी। अंतिम तिथि की प्रतीक्षा किए बिना समय पर बीमा कराने की सलाह दी गई है।मौसम में अनिश्चितता और अल-नीनो के खतरे को देखते हुए फसल बीमा किसानों के लिए बेहद जरूरी है। 31 जुलाई अंतिम तिथि है, इसलिए किसान अंतिम समय का इंतजार किए बिना तत्काल पंजीयन कराएं। जो किसान पिछले वर्ष असहमति आवेदन देकर बाहर हो गए थे, वे भी इस बार अपनी फसलों का बीमा जरूर कराएं ताकि किसी भी प्राकृतिक आपदा में वित्तीय सुरक्षा मिल सके। पीडी हथेश्वर, उप संचालक कृषि बिलासपुर।

