दिव्या न्यूज़ :-कोरबा निहारिका बुधवारी, बाजार शहर के मुख्य बाजारों और व्यस्त सड़कों पर इन दिनों बेसहारा पशुओं का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि आमजन का जीना मुहाल हो गया है। स्थिति यह है कि संध्या होते ही शहर की प्रमुख सड़कों और मुख्य बाजारों में गोवंश व अन्य आवारा पशुओं का जमावड़ा लग जाता हैइसके चलते आए दिन गंभीर हादसे हो रहे हैं जिससे शहरवासियों को भारी ट्रैफिक जाम की समस्या से जूझना पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि शहर की व्यवस्था संभालने वाली नगर पालिका इस गंभीर समस्या पर आंखें मूंदकर बैठी है। शहर के निहारिका रोड , बुधवारी , रोड, मेन बाजार, पुरानी बस्ती रेलवे रोड जैसे व्यस्त इलाकों में बेसहारा पशुओं का कब्जा आम बात हो गई है।दिन के समय भी ये पशु सड़कों के बीचों-बीच डेरा डाले रहते हैं जिससे वाहन चालकों को निकलने में भारी परेशानी होती है। वहीं, जैसे ही शाम ढलती है इन पशुओं की संख्या मुख्य मार्गों पर और अधिक बढ़ जाती है। ठंड या गर्मी के मौसम में ये सड़क की पक्की और गर्म सतह पर बैठ जाते हैं जिससे ट्रैफिक पूरी तरह बाधित हो जाता है।लोगों को कर रहे घायल : हाल ही के हफ्तों में कई लोग इन पशुओं की अचानक टक्कर से घायल होकर अस्पताल पहुंच चुके हैं। स्थानीय दुकानदारों और नागरिकों का कहना है कि शाम के वक्त बाजारों में खरीदारी करने आने वाली महिलाओं और बुजुर्गों के लिए इन रास्तों से निकलना किसी खतरे से खाली नहीं रहता।कई बार आपस में लड़ते हुए ये सांड़ दुकानों के आगे रखे सामान को तोड़ देते हैं और राहगीरों को कुचलने की स्थिति पैदा कर देते हैं।
जाम की गंभीर समस्या से जूझ रहा शहर
सड़कों पर बेसहारा पशुओं के बैठे रहने के कारण शहर में हर रोज पीक आवर्स के दौरान लंबा जाम लग रहा है। एक तरफ संकरी सड़कें और दूसरी तरफ इन पशुओं का कब्जा, शहरवासियों के लिए जी का जंजाल बन गया है। एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहन भी कई बार इस जाम में फंस जाते हैं जिससे किसी बड़ी अनहोनी का खतरा हमेशा बना रहता है। वाहन चालकों को कुछ ही मिनटों का सफर तय करने में घंटों का वक्त लग रहा है।
नगर निगम की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
स्थानीय निवासी बार-बार प्रशासनिक अधिकारियों और नगर निगम कोरबा को इस समस्या से अवगत करा चुकी है इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। नगर निगम की ओर से समय-समय पर आवारा पशुओं को पकड़ने के दावे तो जरूर किए जाते हैं लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। शहरवासियों का कहना है कि नगर निगम के अधिकारी किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं। न तो शहर में पर्याप्त नंदी शालाओं या गोशालाओं की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है और न ही सड़कों से पशुओं को हटाने के लिए कोई स्थायी अभियान चलाया जा रहा है।दिव्या न्यूज़ रिपोर्टर संतोष सिंह |
बेसहारा पशुओं का आतंक, बाजारों और सड़कों पर चलना हुआ मुश्किल
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