दिव्या न्यूज़ 18:-छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के नेहरू नगर में छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड द्वारा सार्वजनिक उपयोग के लिए बनाए सामुदायिक भवन को, निजी संपत्ति बताकर तोड़ने का आदेश जारी कर लिया।दिव्या न्यूज़ :-बिलासपुर। नेहरू नगर में छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड द्वारा सार्वजनिक उपयोग के लिए बनाए सामुदायिक भवन को, निजी संपत्ति बताकर तोड़ने का आदेश जारी कर लिया। आरोपित ने सिटी मजिस्ट्रेट को बताया कि सरकारी भवन उसका अपना 80 साल पुराना जर्जर मकान हैं। सिटी मजिस्ट्रेट के समक्ष तोड़ने की अनुमति का आवेदन दिया था।सिटी मजिस्ट्रेट रजनी भगत ने बिना मालिकाना हक के दस्तावेज जांचे, केवल पटवारी और तहसीलदार के मौका प्रतिवेदन के आधार पर ढहाने का आदेश जारी कर दिया। कुदुदंड निवासी मोहम्मद अली ने आदेश मिलते ही जब भवन में तोड़फोड़ शुरू की, तो वार्ड पार्षद कार्तिक यादव की सूचना पर हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों में हड़कंप मच गया।अधिकारी आनन-फानन में मौके पर पहुंचे और तोड़फोड़ रुकवाई, लेकिन तब तक भवन को काफी नुकसान पहुंच चुका था। सरकारी नियमों के मुताबिक किसी भी शासकीय भवन को ढहाने के लिए संबंधित विभाग की एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) अनिवार्य होती है, जिसका इस मामले में पूरी तरह उल्लंघन किया गया। अंततः गृह निर्माण मंडल के अधिकारियों के निर्देश पर उप अभियंता सानी घोरे ने सिविल लाइन थाने में मोहम्मद अली के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।
निम्न मध्यमवर्ग का सहारा था यह भवन
नेहरू नगर का यह सामुदायिक भवन स्थानीय मध्यमवर्गीय और निम्न मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों का एक बड़ा सहारा था। काफी कम शुल्क होने के कारण लोग यहां शादी, जन्मदिन और अन्य सुख-दुख के कार्यक्रम आयोजित करते थे। सार्वजनिक संपत्ति पर भू-माफिया की नजर पड़ने से स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश है।
तहसीलदार और पटवारी की भूमिका संदिग्ध
पूरे खेल में राजस्व अमले की लापरवाही भी उजागर हुई है। सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा प्रतिवेदन मांगने पर तहसीलदार और पटवारी ने केवल भवन की स्थिति के बारे में ही अपने प्रतिवेदन में जानकारी दी। उन्होंने भवन के स्वामित्व (मालिकाना हक) के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी और न ही जमीन के असली मालिक यानी हाउसिंग बोर्ड के दस्तावेज देखने की जहमत उठाई।
पहले भी विवादों में घिर चुकी हैं सिटी मजिस्ट्रेट
आदेश जारी करने वाली सिटी मजिस्ट्रेट रजनी भगत का विवादों से पुराना नाता रहा है। बिलासपुर अधिवक्ता संघ ने पूर्व में उनके खिलाफ प्रतिबंधात्मक धाराओं में जमानत देने के एवज में प्रति व्यक्ति पांच हजार रुपये रिश्वत मांगने का संगीन आरोप लगाकर मोर्चा खोला था। इस मामले को लेकर अधिवक्ताओं ने कोर्ट परिसर में उग्र प्रदर्शन भी किया था।

