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दिव्या न्यूज़ :-छत्तीसगढ़ में 8 नई ओपन जेल शुरू होंगी, जिनमें 3 महिला बंदियों के लिए होंगी। कैदियों को कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और परिवार से मिलने की अधिक स्वतंत्रता मिलेगी।रायपुर। छत्तीसगढ़ में बंदियों के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य में कुल 8 नई ओपन जेल शुरू होने वाली हैं। इनमें से 3 ओपन जेल महिला बंदियों के लिए होंगी। इन जेलों में अच्छे आचरण वाले पात्र बंदियों को सीमित निगरानी में रखते हुए कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और पुनर्वास के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।
जेल डीजी हिमांशु गुप्ता के मुताबिक, यह एक यूनिक कॉन्सेप्ट है, जिसमें उपलब्ध अधोसंरचना का ही उपयोग करते हुए ओपन जेल शुरू की जा रही हैं। इससे शासन पर कोई अतिरिक्त व्यय नहीं आएगा, जबकि बंदियों को व्यवहारिक सुविधाओं, प्रशिक्षण और पुनर्वास की दिशा में व्यापक अवसर मिलेंगे।
कहां कितनी क्षमता की ओपन जेल
राज्य में प्रस्तावित 8 ओपन जेलों में अलग-अलग क्षमता निर्धारित की गई है। इनमें बेमेतरा के पथर्रा में सबसे अधिक 200 पुरुष बंदियों की क्षमता वाली ओपन जेल होगी।13 अगस्त को जारी हुए खुली जेल के नियम
छत्तीसगढ़ शासन ने 13 अगस्त 2026 को छत्तीसगढ़ खुली जेल (प्रबंधन एवं संचालन) नियम जारी किए हैं। इन्हीं नियमों के तहत इन खुली जेलों का संचालन किया जाएगा। ओपन जेल में बंदियों को सामान्य जेल की तुलना में अधिक स्वतंत्र वातावरण मिलेगा। उन्हें सीमित निगरानी में रखा जाएगा और कौशल प्रशिक्षण के साथ रोजगार के साधन उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा।परिवार से मिलने और काम करने की मिलेगी ज्यादा स्वतंत्रता
खुली जेल में पात्र बंदियों को अपने परिवार से मिलने की अपेक्षाकृत अधिक स्वतंत्रता होगी। वे खेतों और आसपास के व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में काम कर सकेंगे। इसके अलावा इच्छुक बंदी लघु व्यवसाय भी चला सकेंगे। बंदियों को अपना भोजन स्वयं बनाने और सामान्य जीवनशैली अपनाने की सुविधा भी दी जाएगी। चूंकि यहां ऐसे बंदियों का चयन किया जाएगा जिनका आचरण अच्छा रहा हो, इसलिए सामान्य जेलों की तुलना में सुरक्षा व्यवस्था अपेक्षाकृत कम होगी।अच्छे आचरण वाले बंदियों का होगा चयन
ओपन जेल में हर बंदी को प्रवेश नहीं मिलेगा। सामान्यतः ऐसे बंदियों को पात्र माना जाएगा जिन्होंने अपनी सजा का बड़ा हिस्सा बिना अनुशासनहीनता के पूरा किया हो, जिनसे गंभीर अपराध की पुनरावृत्ति की आशंका न हो और जिनकी सामाजिक पृष्ठभूमि स्थिर एवं सकारात्मक हो। पात्र बंदियों का चयन जेल मुख्यालय में गठित चार सदस्यीय हाई पावर कमेटी द्वारा किया जाएगा। इस कमेटी के अध्यक्ष जेल डीजी होंगे।ITI और कौशल प्रशिक्षण से रोजगार पर जोर
नई खुली जेलों को ITI, कौशल विकास केंद्रों, कौशल विकास संस्थानों, ओपन स्कूल और IGNOU जैसी संस्थाओं का एक्सेस मिलेगा। बेमेतरा के पथर्रा स्थित ओपन जेल में ITI की स्थापना की जाएगी। प्रथम चरण में यहां फैब्रिकेशन ट्रेड शुरू किया जाएगा। इसके तहत बंदियों को वेल्डिंग, सोल्डरिंग और मेटल बेंडिंग के साथ स्टील अलमारी, स्टील रैक सहित अन्य सामान बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्हें जेल उद्योग में रोजगार उपलब्ध कराने की योजना है।
रिहाई के बाद भी आर्थिक मदद की योजना
जेल से रिहाई के बाद इच्छुक बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए इंडियन ओवरसीज बैंक के माध्यम से ऋण और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की योजना भी है। इसका उद्देश्य बंदियों को जेल से बाहर आने के बाद रोजगार या स्वरोजगार से जोड़ना है।
बेहतर जीवन की ओर लौटने का अवसर
जेल डीजी हिमांशु गुप्ता के अनुसार, खुली जेल की अवधारणा का मुख्य उद्देश्य बंदियों को बेहतर जीवन की ओर अग्रसर करना है। खुले वातावरण में रहने से बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य में सुधार, पारिवारिक संबंधों को मजबूत करने और समाज के लिए उपयोगी नागरिक बनने में मदद मिल सकती है।

