शराब घोटाले से जुड़े मामले में क़वाशी लखमा करीब 1 साल तक जेल में रहे इस दौरान में विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले सके अब उच्च न्यायालय की ओर से 3 फरवरी को उन्हें अंतरिम जमानत दी गई है । विधानसभा की ओर से स्पष्ट किया गया है कवासी लखमा को जब भी सदन में आना या जाना होगा इसकी जानकारी पहले से विधानसभा सचिव को देनी होगी उनकी आवाजाहि पर नजर रहेगी और पूरा कार्यक्रम औपचारिक रूप से दर्ज किया जाएगा । उन्हें अपने निवास क्षेत्र का दौरा करने की अनुमति नहीं होगी यानी वह सत्र के दौरान किसी भी तरह की राजनीतिक गतिविधि या क्षेत्रीय कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सकेंगे उनकी मौजूदगी केवल विधानसभा परिषद और सत्र की कार्यवाही तक सीमित रहेगी । सबसे महत्वपूर्ण शर्त नो स्पीच से जुड़ी है उन्हें अपने ऊपर चल रहे मामले के संबंध में किसी भी प्रकार का बयान देने या चर्चा करने की अनुमति नहीं होगी । वे बजट या अन्य सामान्य विषयों पर चर्चा में भाग ले सकते हैं लेकिन अपने केस से जुड़े किसी भी मुद्दे पर ना तो बोलेंगे और ना ही टिप्पणी करेंगे । यदि उन्होंने इन शर्तों का उल्लंघन किया तो उनकी अनुमति तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी जाएगी यह भी स्पष्ट किया गया है कि मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण सदन में भी इस विषय पर कोई चर्चा नहीं की जाएगी ।
जमानत के बाद 1 साल बाद सदन में दिखाई देंगे कवासी लखमा ।
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शराब घोटाले से जुड़े मामले में क़वाशी लखमा करीब 1 साल तक जेल में रहे इस दौरान में विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले सके अब उच्च न्यायालय की ओर से 3 फरवरी को उन्हें अंतरिम जमानत दी गई है । विधानसभा की ओर से स्पष्ट किया गया है कवासी लखमा को जब भी सदन में आना या जाना होगा इसकी जानकारी पहले से विधानसभा सचिव को देनी होगी उनकी आवाजाहि पर नजर रहेगी और पूरा कार्यक्रम औपचारिक रूप से दर्ज किया जाएगा । उन्हें अपने निवास क्षेत्र का दौरा करने की अनुमति नहीं होगी यानी वह सत्र के दौरान किसी भी तरह की राजनीतिक गतिविधि या क्षेत्रीय कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सकेंगे उनकी मौजूदगी केवल विधानसभा परिषद और सत्र की कार्यवाही तक सीमित रहेगी । सबसे महत्वपूर्ण शर्त नो स्पीच से जुड़ी है उन्हें अपने ऊपर चल रहे मामले के संबंध में किसी भी प्रकार का बयान देने या चर्चा करने की अनुमति नहीं होगी । वे बजट या अन्य सामान्य विषयों पर चर्चा में भाग ले सकते हैं लेकिन अपने केस से जुड़े किसी भी मुद्दे पर ना तो बोलेंगे और ना ही टिप्पणी करेंगे । यदि उन्होंने इन शर्तों का उल्लंघन किया तो उनकी अनुमति तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी जाएगी यह भी स्पष्ट किया गया है कि मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण सदन में भी इस विषय पर कोई चर्चा नहीं की जाएगी ।