दिव्या न्यूज़ 18:-प्रदेश सरकार कोचिंग सेंटरों पर शिकंजा कसने जा रही है। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ कोचिंग सेंटर (नियंत्रण एवं विनियमन) विधेयक 2026 का प्रारूप तैयार किया जा रहा है। इस विधेयक में अधिक विद्यार्थियों वाले कोचिंग सेंटरों का पंजीकरण अनिवार्य करने, पांच वर्ष की पंजीकरण वैधता देने, शुल्क संबंधी पारदर्शिता, पाठ्यक्रम छोड़ने पर शुल्क वापसी तथा छात्रावासों की सुरक्षा के प्रविधान प्रस्तावित हैं।विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए परामर्श व्यवस्था, उत्पीड़न संबंधी शिकायतों का निराकरण और चौबीसों घंटे हेल्पलाइन की व्यवस्था भी की जाएगी। राज्य में 10 हजार से अधिक कोचिंग सेंटर संचालित हैं। सरकार का उद्देश्य कोचिंग संस्थानों में अनुशासन और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने के साथ विद्यार्थियों की सुरक्षा करना है।
विधेयक से संस्थानों की जवाबदेही बढ़ेगी और विद्यार्थियों को अनावश्यक शैक्षणिक दबाव, मनमानी फीस तथा अन्य समस्याओं से राहत मिलने की उम्मीद है। विद्यार्थियों के साथ अभिभावकों के हितों की रक्षा भी सरकार की प्राथमिकता बताई गई है।
उच्च शिक्षा विभाग ने अभिभावकों, शिक्षाविदों, युवाओं, हितधारकों और आम लोगों से विधेयक के प्रारूप पर सात दिनों के भीतर सुझाव और अभिमत मांगे हैं। प्रारूप विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाएगा। इच्छुक नागरिक अपने सुझाव che-higheredu.cg@gov.in पर भेज सकते हैं।
मुख्य सचिव करेंगे निगरानी
विधेयक के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्यस्तरीय प्राधिकरण और जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में जिला समितियां गठित करने का प्रस्ताव है। नियमों के उल्लंघन पर 10 हजार से पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। गंभीर मामलों में पंजीकरण निरस्त करने का भी प्रविधान प्रस्तावित है।

