दिव्या न्यूज़ :-संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सिम्स (छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान) में स्टाफ का अमानवीय चेहरा सामने आया है। सोमवार की रात डेढ़ बजे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मस्तूरी से रेफर होकर पांच दिन के नवजात के साथ प्रसूता अपने स्वजन के साथ इलाज के लिए सिम्स पहुंची थी। उन्हें बिना इलाज के रात को ही लौटा दिया गया। 20 वर्षीय महिला को पेट दर्द था और ब्लड चढ़ाना था।
महिला को स्टाफ नर्स ने वापस लौटा दिया
साथ ही उनके पांच दिन के शिशु का एक हाथ नहीं उठ रहा था, जिसका एक्स-रे कराने के लिए महिला सिम्स पहुंची थी। इस बीच महिला को स्टाफ नर्स ने यह कहते हुए लौटा दिया कि रात में बड़े डॉक्टर नहीं हैं, इलाज नहीं होगा। वैसे भी पेट दर्द और पाइल्स से कोई नहीं मरता। रात में महिला को भर्ती भी नहीं किया गया।मजबूरन महिला को अपने स्वजन के साथ रात तीन बजे ही आटो कर अपने गांव जयरामनगर खैरा लौटना पड़ा। जयरामनगर खैरा निवासी मुस्कान बघेल की सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मस्तूरी में तीन जून को डिलीवरी हुई। उन्हें तीन दिन बाद छह जून को डिस्चार्ज किया गया।
बिलासपुर सिम्स रेफर की गई थी महिला
महिला के घर लौटने के बाद उनके पेट में तेज दर्द होने लगा और उनके बच्चे का एक हाथ नहीं उठने का पता चला। इसके बाद वह स्वजन के साथ आठ जून को फिर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मस्तूरी पहुंची। जहां महिला को ब्लड चढ़ाने की जरूरत बताई गई। इस दौरान मस्तूरी के डाक्टरों ने ब्लड चढ़ाने, पाइल्स की समस्या और शिशु के हाथ का एक्स-रे कराने की बात कहते हुए बिलासपुर सिम्स रात 12:30 बजे रेफर कर दिया।संजीवनी एक्सप्रेस 102 से रात डेढ़ बजे महिला अपने स्वजन के साथ सिम्स पहुंची। इस बीच शिशु प्रसव कक्ष में भर्ती होने के लिए गई तो उन्हें इमरजेंसी वार्ड में डाक्टर से अनुमति लेकर आने की बात कही गई, तो ही महिला को भर्ती लेने की बात कही गई। इस दौरान पेट दर्द को कम करने के लिए महिला को इलाज के नाम पर सिर्फ सुई लगाई गई।
मस्तूरी के डाक्टरों ने बिना डिस्चार्ज पर्ची दिए बिना किया था रेफर
सोमवार की रात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मस्तूरी के डाक्टरों ने महिला को सिम्स में रेफर तो कर दिया, लेकिन स्वजन को डिस्चार्ज पर्ची नहीं दी गई। डिस्चार्ज पर्ची नहीं होने की वजह से भी सिम्स में भर्ती लेने से इनकार किया गया। महिला के पति सुरेंद्र बघेल डाक्टरों की इस लापरवाही पर उनके खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने की बात कहते रहे।

