ग्राम ढप ढप में बसंत अग्रवाल के लिए आयोजकों द्वारा धक्का मुक्की, धीरेंद्र शास्त्री जी के सेवकों में नाराजगी, प्रेस की उपेछा, और चंदे को लेकर भी उठे सवाल:

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दिव्य न्यूज़ 18 :- बाकी मोगरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम ढप ढप में आयोजित पंडित धीरेंद्र शास्त्री की श्री  हनुमान कथा अब विवादों के घेरे में आती जा रही है| ताजा घटना क्रम में शास्त्री जी के करीबी माने जाने वाले बसंत अग्रवाल जी के साथ आयोजकों द्वारा धक्का मुक्की की गई | यह बात सामने आई है| जिससे शास्त्री जी के सेवकों एवं समर्थकों में नाराजगी बढ़ गई है| प्रत्यक्ष दर्शियों के अनुसार अग्रसेन भवन में कार्यक्रम के दौरान बसंत अग्रवाल एवं आयोजन समिति के कुछ सदस्यों के बीच कहां सुनी हो गई| जो देखते ही देखते धक्का मुक्की एवं मारपीट में बदल गई| इस घटना ने पूरे आयोजन की व्यवस्थाओं एवं आपसी समन्वय के ऊपर सवाल खड़े कर दिए हैं| बताया जा रहा है कि बसंत अग्रवाल कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को लेकर सक्रिय थे |, लेकिन आयोजक पक्ष के साथ उनका तालमेल नहीं बन पाया | इस कारण विवाद की स्थिति निर्मित हुई| प्रेस की उपेक्षा पर भी सवाल :- इस पूरे आयोजन को लेकर स्थानीय मीडिया में भी नाराजगी व्याप्त है| जानकारी के अनुसार इतने बड़े धार्मिक आयोजन में| स्थानी मीडिया को ना तो पास उपलब्ध करवाया गया| और ना ही पंडित धीरेंद्र शास्त्री से कोई औपचारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई| यही कारण बताया जा रहा है कि प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया मैं इस कार्यक्रम को अपेक्षित तवज्जो नहीं मिल पा रहा है| चंदे को लेकर भी उठे सवाल :- आयोजकों द्वारा पूर्व में प्रेस को बताया गया था कि इस आयोजन में लगभग सवा करोड रुपए चंदे के माध्यम से जुटाई जा रहे हैं| वहीं शासन को प्रशासन का व्यापक सहयोग मिलने के साथ-साथ कोरबा की औद्योगिक पृष्ठभूमि को देखते हुए विभिन्न उद्योगों से भी आर्थिक सहयोग मिलने का संभावना जताई गई है| सूत्रों के अनुसार करीब 1 महीने पहले से चंदा संग्रह की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी| और इसके लिए बाकायदा कार्यालय भी संचालित किया गया| बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भी स्वेच्छा से सहयोग राशि दी है| ऐसे में अब यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है की चंदे के पैसे को आपसी लेन देन और व्यवस्थाओं को लेकर आसहमति ही विवाद की बड़ी वजह हो सकती है| समन्वय के अभाव से बढा विवाद:= स्थानीय लोगों का मानना है कि जहां इस आयोजन के माध्यम से धार्मिक और सामाजिक सौहार्द का संदेश जाना चाहिए वही लगातार सामने आ रहे विवादों से इसकी छवि प्रभावित हो रही है| शास्त्री जी के सेवकों में नाराजगी और आयोजकों के बीच खींच तान से यह स्पष्ट है कि समन्वय की कमी से स्थिति को और बिगाड़ दिया है | फिलहाल कथा के दरबार का आयोजन जारी है| लेकिन विवादों की छाया इस धार्मिक कार्यक्रम पर स्पष्ट रूप से नजर आ रही है| ऐसे में अब सब की नजर इस बात पर है कि आगे आयोजन और संबंधित पक्ष इस स्थिति को कैसे संभालते हैं| ताकि आस्था का यह आयोजन विवादों की स्थिति से बाहर निकल सके| स्थानीय लोगों का मानना है कि जहां इस आयोजन के माध्यम से धार्मिक और सामाजिक सौहार्द का संदेश जाना चाहिए था| वही लगातार सामने आ रहे विवादों से इस धार्मिक अनुष्ठान की छवि प्रभावित हो रही है| शास्त्री जी के सेवकों में नाराजगी और आयोजकों के बीच खींचतान से यह स्पष्ट है की समन्वय की कमी ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है |

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