दिव्या न्यूज़ 18 :- गाजियाबाद के हरीश राणा का आज दिल्ली के एम्स अस्पताल में निधन हो गया| वह बीते 13 साल से कोमा में थे | देश के सुप्रीम कोर्ट ने बीते दिनों उन्हें इच्छा अनुसार मृत्यु की इजाजत दी थी | हरीश राणा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स ) के इंस्टिट्यूट रोटरी कैंसर अस्पताल मैं भर्ती थे |
बेटे के निधन से पहले मां की प्रार्थना:- हरीश की मां अस्पताल के गलियारे में बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ कर रही थी| बेटे के निधन से पहले मां ने भावुक होकर अपनी बात कही थी | उन्होंने कहा मेरा बेटा सांस ले रहा है| उसकी धड़कन अभी भी चल रही है| मां ने यह भी कहा कि वह मुझे छोड़कर जा रहा है | अब पूरा मामला विस्तार से जुलाई 2010 में हरीश ने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया था| वर्ष 2013 में वह अंतिम वर्ष के छात्र थे| इसी दौरान अगस्त 2013 में रक्षाबंधन वाले दिन बहन से मोबाइल फोन पर बात करते हुए पी जी की चौथी मंजिल से गिर गए थे| गंभीर रूप से घायल हरीश को तुरंत पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया | बाद में दिसंबर 2013 में उन्हें दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया | जहां डॉक्टरों ने बताया कि वह क्वाडरी प्ले जिया से ग्रसित है 
इस स्थिति में उनके हाथ पैर पूरी तरह निष्क्रीय हो गए| और वह जीवन भर बिस्तर पर रहने को मजबूर हो गए| हरीश के असहनी दर्द और शारीरिक अक्षमता के कारण माता-पिता ने दिल्ली हाईकोर्ट में इच्छा मृत्यु की अपील की | जिसे 8 जुलाई 2025 को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया| इसके बाद परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की | करीब 8 महीने बाद 11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने हरीश को इच्छा मृत्यु की अनुमति दे दी | इच्छा मृत्यु की प्रक्रिया:- सुप्रीम कोर्ट द्वारा इच्छा मृत्यु की इजाजत मिलने के बाद यह प्रक्रिया शुरू हुई थी | हरीश राणा 13 साल से बिस्तर में थे| डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनकी स्थिति पर लगातार नजर रख रही थी | एक सप्ताह तक बिना भोजन और पानी के रहने के बाद उनका निधन हुआ| यह एक जटिल और संवेदनशील मामला था|




