छत्तीसगढ़ के चाम्पा |जांजगीर जिले के ग्राम पंतोरा की अनोखी होली

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दिव्य न्यूज़ 18:- कोरबा रिपोर्टर विनय कुमार के अनुसार जो जिला मुख्यालय से करीब 40 से 45 किलोमीटर दूर स्थित है | वहां यह आयोजन होली के पांचवें दिन यानी रंग पंचमी पर होता है| इसे स्थानीय भाषा में डांगाही  होली कहा जाता है| इस उत्सव की शुरुआत मां भवानी के मंदिर से होती है मंदिर में कन्याएं पहले देवताओं को छड़ी मार कर  परंपरा की शुरुआत करती है| इसके बाद मंदिर के बाहर खड़ी कन्याओं की टोली वहां से गुजरने वाले हर शख्स पर लाठियां बरसाती है|  लाठिया बनाने के लिए मड़वा रानी जंगल की लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता है ;- ग्रामीणों के मुताबिक इस पर्व के लिए विशेष बांस की छड़ी कोरबा जिले के मड़वारानी जंगल से लाई जाती है | खास बात यह है कि इस बांस का चयन किया जाता है जो एक ही कुल्हाड़ी के बार में कट जाए | इसे


शुभ माना जाता है| छड़ी को मां भवानी के समक्ष अभिमंत्रित किया जाता है| और बैगा (परम्परिक पुजारी ) से सिद्ध कराया जाता है|            बीमारियों से मुक्ति की है अटूट आस्था ;- इस लठमार पर्व में केवल स्थानीय ही नहीं बल्कि दूर दराज से आए उनके रिश्तेदार भी उत्साह से भाग लेते हैं | इसके पीछे सबसे बड़ी वजह यह आस्था है कि जो भी व्यक्ति इन अभिमंत्रित लकड़ियों की मार खाता है वह साल भर बीमारियों से दूर रहता है| लोग इस चोट के रूप में नहीं बल्कि माता के प्रसाद और आशीर्वाद के रूप में स्वीकार करते हैं|         

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इस होली की खास बात यह है कि राह गीर भी रुक कर मार खाते हैं| पंतोरा


गांव की निवासी मुनिया बताती है की मंदिर के बैगा पूजा के बाद सिद्ध छडिया कन्याओं को सौंप देते हैं| इसके बाद लड़कियों की टोली मंदिर के बाहर तैनात हो जाती है| और बच्चों से लेकर बड़ों तक सब को छड़ी मारती है| सबसे खास बात यह है कि रास्ते से गुजरते राहगीर भी रुक कर इन छड़ियों से मार खाते हैं | इस उत्सव में ना तो कोई विरोध करता है और ना ही कोई इसका बुरा मानता है| न्यूज़ रिपोर्टर विनय कुमार दिव्य न्यूज़ 18

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