दिव्य न्यूज़ 18:-कोरबा जिले में अवैध रूप से लाल ईंट भट्ठा चलाए जा रहे हैं। लाल ईंट भट्ठा लगाने की अनुमति निजी काम की शर्त पर दिया जाता है, लेकिन इसका व्यवसायिक उपयोग किया जा रहा है। इससे सरकार को राजस्व का घाटा हो रहा है। साथ ही ईंटों को पकाने के दौरान निकल रहे धुआं से प्रदूषण भी बढ़ रहा है। वहीं नदियों का दोहन भी हो रहा है। बांग्ला ईंट भट्ठा लगाने के लिए आसपास की नदियों से बालू का अवैध उठाव भी हो रहा है। ईंट पकाने के लिए जंगलों से पेड़ों की अवैध कटाई हो रही है। बावजूद इसके इसे रोकने के लिए प्रशासन गंभीर नहीं है। लाल ईंट भट्ठों के संचालक पर्यावरण एवं श्रम कानून को भी धत्ता बता रहे हैं। इनके पास न तो पर्यावरण विभाग की एनओसी है और न ही ईंट भट्ठा का लाइसेंस। चिमनी ईंट की तुलना में इस ईंट का मूल्य लगभग 200 से 300 रुपए कम होता है। इस अवैध कारोबार के एवज में संबंधित अंचल कार्यालय व खनन विभाग से सेटिंग रहती है। पुलिस का भी संरक्षण प्राप्त होता है।
लाल ईंट भट्ठा लगाने का प्रावधान केवल घरेलू उपयोग के लिए ही होता है, व्यवसाय के लिए नहीं। इसके लिए जिला खनन विभाग से आदेश लेना पड़ता है। जिले में बड़ी संख्या में ईंट भट्ठा व्यावसायिक उपयोग के लिए लगाए जा रहे हैं। इसमें अहम बात यह है कि किसी भी सरकारी भवन निर्माण के इस्टीमेट में चिमनी भट्ठा का ईंट लगाने का प्रावधान रहता है, लेकिन अधिक लाभ कमाने के चक्कर में चिमनी भट्ठा की जगह लाल ईंट का उपयोग किया जाता है। इससे सरकार के राजस्व की चोरी होती है।
अत्यधिक वायु प्रदूषण, पर्यावरण को नुकसान और बिना अनुमति/अवैध संचालन के कारण लाल ईंट भट्ठों पर प्रतिबंध लगाया जाता है। बताया जाता है लाल ईंट भट्ठा से भारी धुंआ निकलता है। चिमनी नहीं रहने के कारण धुंआ ऊंचाई पर नहीं निकलता है। भारी मात्रा में कार्बन डाईऑक्साइड और जहरीली कणों का उत्सर्जन होता है। लाल ईंट भट्ठे पर्यावरणीय मंजूरी के बिना या अवैध रूप से चलाने के कारण पर्यावरण को अधिक नुकसान होता है। घनी आबादी के पास भट्ठा होने के कारण स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं।
खनन विभाग को कार्रवाई का अधिकार नहीं इस संबंध में जिला खनन पदाधिकारी ने कहा कि लाल ईंट भट्ठों पर कार्रवाई करने का अधिकार खनन विभाग को नहीं है। इस पर सिर्फ पर्यावरण विभाग ही कार्रवाई कर सकता है।
प्रतिबंध के बावजूद जिले में लाल ईट भट्टो का संचालन:
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