दिव्य न्यूज़ 18:-रायपुर। सूबे की सियासत में आने वाले कुछ वर्ष बड़े बदलावों के गवाह बनने वाले हैं। आगामी राष्ट्रीय जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन से प्रदेश का राजनीतिक भूगोल पूरी तरह बदल जाएगा।वर्तमान में 90 सीटों वाली छत्तीसगढ़ विधानसभा का स्वरूप विस्तार पाकर 120 सीटों तक पहुंचने की प्रबल संभावना है। केवल विधानसभा ही नहीं, बल्कि प्रदेश की 11 लोकसभा सीटों की संख्या में भी वृद्धि होगी।
इस बदलाव से न केवल क्षेत्रों की सीमाएं बदलेंगी, बल्कि कई दशकों से जमे-जमाए राजनीतिक और जातिगत समीकरण भी पूरी तरह ध्वस्त हो जाएंगे।
डिजिटल मॉडल पर आधारित होगी 2027 की जनगणना
प्रशासन ने आगामी राष्ट्रीय जनगणना 2027 को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इस बार की जनगणना ऐतिहासिक होगी, क्योंकि यह पूरी प्रक्रिया ‘डिजिटल मॉडल’ पर आधारित होगी। डेटा जुटाने के लिए कागजी दस्तावेजों के बजाय मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग किया जाएगा। नागरिकों को स्वयं अपनी जानकारी आनलाइन भरने का विकल्प भी मिलेगा।
दूसरे चरण में जनसंख्या गणना
दूसरे चरण में सामान्य, संस्थागत और बेघर परिवारों के सदस्यों की विस्तृत गणना की जाएगी। रायपुर सहित कई निकायों ने इसके लिए मकानों की नंबरिंग शुरू कर दी है।
90 से 120: विधानसभा सीटों का गणित
वर्ष 2000 में राज्य गठन के बाद 2003 से छत्तीसगढ़ में विधानसभा सीटों की संख्या 90 बनी हुई है। हालांकि, संशोधित अनुच्छेद 82 के अनुसार, 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना के आधार पर नया परिसीमन किया जाना है।
दो चरणों में संपन्न होगी जनगणना
पहले चरण में भवनों की गिनती, उनके उपयोग (आवासीय या कार्यालय) और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दर्ज की जाएगी। प्रत्येक 180 से 200 भवनों पर एक प्रगणक नियुक्त होगा।




