विधानसभा में धर्म स्वतंत्रय विधेयक 2026 पारित|

Must Read

दिव्य न्यूज़ 18:-विजय शर्मा ने पेश किया प्रस्ताव विपक्ष का बहिष्कार :-उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि उच्चतम न्यायालय की ओर से ऐसी कोई रोक नहीं है, जो राज्यों को इस तरह के कानून बनाने से रोकती हो। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला देते हुए कहा कि राज्य सरकारों को सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े मामलों पर कानून बनाने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। इसके बाद विपक्ष ने सदन से बहिष्कार कर दिया। वहीं भाजपा विधायक ने जय श्रीराम के नारे लगाए।

मतांतरण के लिए ये होगी प्रक्रिया

जो व्यक्ति मतांतरण करना चाहेगा, उसे प्राधिकृत अधिकारी के पास आवेदन करना होगा। इसके बाद उस व्यक्ति की जानकारी वेबसाइट, ग्राम पंचायत व संबंधित थाने में प्रदर्शित की जाएगी। 30 दिन के भीतर दावा आपत्ति व जांच की प्रक्रिया होगी।

गवाहों से पूछताछ, शपथ पत्र व अन्य जानकारी ली जाएगी। इसके बाद वैध आवेदन घोषित किया जा सकेगा। वैध निर्धारित की तिथि से 90 दिन के भीतर मतांतरण नहीं हुआ तो इस आवेदन की प्रक्रिया समाप्त मानी जाएगी।

सजा और जुर्माने के कड़े प्रविधान

सामान्य मामला: अवैध मतांतरण पर सात से 10 साल की जेल और न्यूनतम पांच लाख रुपये का जुर्माना।

विशेष श्रेणी: यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, एससी-एसटी या ओबीसी वर्ग से है, तो सजा 10 से 20 साल की जेल और न्यूनतम 10 लाख रुपये का जुर्माना।

सामूहिक मतांतरण: इस स्थिति में सजा 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक हो सकती है और जुर्माना कम से कम 25 लाख रुपये होगा।

इस नए कानून में विशेष रूप से महिलाओं नाबालिग अनुसूचित जाति- जनजाति और पिछड़ा वर्ग के व्यक्तियों के साथ होने वाले अवैध माथांतरण के मामलों में 20 वर्ष तक की कैद का सख्त प्रावधान किया गया है| साथ ही डिजिटल माध्यमों से दिए जाने वाले प्रलोभन को भी अपराध कि श्रेणी में शामिल कर सभी संबंधित अपराधों को संघए और गैर जमानती बताया गया है| 6 अध्यायों और 31 बिंदुओं में विस्तृत इस विधेयक की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें पेत्रक धर्म में वापसी को मतातरण के दायरे से बाहर रखा गया है | और इन गंभीर मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए प्रत्येक जिले में विशेष सत्र न्यायालय गठित करने का निर्णय लिया गया | ताकि राज्य की संस्कृततिक अस्मिता और धार्मिक स्वतंत्रता को अवैध दखल से पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सके| यह विधेयक छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रय विधेयक 1968 की जगह लेगा |

मतांतरण के लिए हुए विवाह होंगे अवैध

अंतरधार्मिक विवाह कराने वाले धर्मगुरु (फादर, प्रीस्ट, मौलवी आदि) को विवाह से आठ दिन पहले सक्षम प्राधिकारी के सामने घोषणापत्र देना होगा। यदि अधिकारी को लगता है कि विवाह का मुख्य उद्देश्य केवल मतांतरण है, तो ऐसे विवाह को अवैध घोषित किया जा सकता है।

Latest News

ZOMATO से अब खाना ऑर्डर करना हुआ महंगा|

दिव्य न्यूज़ 18 :- जोमैटो डिलीवरी प्लेटफार्म जोमैटो से खाना ऑर्डर करना अब महंगा हो गया है| कंपनी ने...

More Articles Like This