मुख्यमंत्री श्री साय ने ममता को लिखा पत्र कहा मतभेद हो लेकिन मन भेद ना हो|

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दिव्य न्यूज़ 18:- पहली बार राष्ट्रपति को अपनी पीड़ा व्यक्त करनी पड़ी:- श्री साय ने कहा कि देश में पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी राज्य की सरकार के व्यवहार को लेकर स्वयं राष्ट्रपति को अपनी पीड़ा सार्वजनिक करनी पडी | यह स्थिति देश के लोकतांत्रिक इतिहास में अत्यंत चिंता जनक है | और इससे पश्चिम बंगाल जैसे प्रतिष्ठित राज्य की छवि को भी ठेस पहुंची है | साय ममता बनर्जी से आग्रह करते हुए कहा कि वे इस विषय पर देश और समाज से क्षमा मांगते हुए अपनी भूल स्वीकार करें| तथा भविष्य में लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक पदों के प्रति सम्मान बनाए रखने के लिए देश को आश्वस्त करें |

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[ साय ने कहा कि देश की प्रथम महिला राष्ट्रपति के खिलाफ यह व्यवहार केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि देश की सर्वोच्च संवैधानिक व्यवस्था आदिवासी समाज और मातृशक्ति का अपमान है | साथ में अपने पत्र में कहा कि भारत में लोकतांत्रिक परंपराएं और शिष्टाचार पूरी दुनिया में सम्मानित रहे हैं| मतभेद को कभी भी मन भेद में ना बदले यही हमारी संस्कृति रही है| लेकिन राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च संवैधानिक पद के प्रति न्यूनतम शिष्टाचार का भी पालन ना किया जाना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है यह घटना करोड  आदिवासियों पिछड़ों और दलितों की भावनाओं को आहत करने वाली है| पहली बार राष्ट्रपति को अपने दिल की पीड़ा व्यक्त करनी पड़ी भावनाओं को आहत करने वाली बात है |

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