दिव्य न्यूज़ 18:- दोनों ने 25 फरवरी को हिंदू रीति रिवाज के अनुसार अग्नि के फेरे लिए और दांपत्य जीवन में प्रवेश किया | विवाह से पहले अनिल और बिंदु की सगाई तथा मेहंदी की रस्में निभाई गई| आशीर्वाद समारोह में समाज के कई लोगों ने उपस्थित होकर नव दंपति को शुभकामनाएं दी|| बालिका गृह की संचालिका रुक्मणी नायर ने बताया कि उनके केंद्र में कोरबा चांपा जांजगीर और शक्ति जिलों से शोषित एवं प्रताड़ित बालिकाएं आती है| इन बालिकाओं को 18 वर्ष की आयु तक आश्रय दिया जाता है| जहां उन्हें रहने खाने पीने की व्यवस्था के साथ शिक्षा भी प्रदान की जाती है |
o बालिका गृह में अपना जीवन बिता चुकी भारती ने बताया कि वह तीन बहने हैं | और बचपन से ही उनके माता-पिता नहीं थे| तीनों बहनें बालिका गृह में रहती थी| 18 साल होने के बाद भारती ने विवाह की इच्छा जताई| और एक अच्छे घर में शादी होकर गई | उनकी एक बहन नौकरी कर रही है| जबकि सबसे छोटी बहन अभी भी बालिका गृह में है |] संचालिका रुक्मणी नायर ने यह भी बताया कि इस विवाह का आयोजन समाज को प्लास्टिक मुक्त संदेश देने के उद्देश्य किया गया था |] विवाह समारोह में प्लास्टिक से संबंधित किसी भी सामग्री का उपयोग नहीं किया गया | केंद्र में हुई छठी शादी हुई है | रुक्मणी नायर के अनुसार बालिका गृह में वर्तमान में 50 बालिकाएं हैं | 18 वर्ष की आयु पूरी होने पर इन्हें नौकरी विवाह या किसी के साथ वैधानिक रूप से रहने के लिए भेजा जाता है| कई अनाथ बेटियां यहां रहकर पढ़ाई कर चुकी है| और आज विभिन्न स्थानों पर नौकरी कर रही है| बिंदु इस केंद्र से विवाह करने वाली छठी बालिका है | अनिल जिन्होंने बिंदु का हाँथ थामा है |छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी में एक स्थाई कर्मचारी है | उन्होंने स्वयं बिंदु का चयन किया| रुक्मणी नायर ने बताया कि अनिल के माता-पिता नहीं है और वह अपने रिश्तेदारों के साथ रहते हैं| उन्होंने एक अनाथ लड़की से विवाह कर पारिवारिक जीवन जीने की इच्छा व्यक्त की थी | 




