पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा यह कौशल्या माता की धरती है, और मैं यहां का भांचा हू|

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दिव्य न्यूज़ 18:-ऊर्जाधानी कोरबा आज भक्ति और जोश के दोहरे सैलाब में डूब गई.बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का कोरबा आगमन किसी उत्सव से कम नहीं रहा.ढपढप के कथा स्थल पर जनसैलाब इस कदर उमड़ा कि तिल रखने की जगह नहीं बची। मंच संभालते ही बाबा ने जहाँ कोरबा के कोयले की ताकत बताई, वहीं धर्मांतरण करने वालों को खुले मंच से चेतावनी दे डाली.कथा के पहले ही दिन धीरेंद्र शास्त्री ने कोरबा शहर की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि यह शहर पूरे देश को रोशन करता है.उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, “अगर कोरबा वाले कोयला देना बंद कर दें, तो हमारे मध्य प्रदेश में बिजली नहीं जलेगी, वहाँ अंधेरा छा जाएगा.” इस बयान के साथ उन्होंने कोरबा वासियों का दिल जीत लिया.

“मैं छत्तीसगढ़ का भांचा हूँ”
भावुक होते हुए शास्त्री जी ने खुद को छत्तीसगढ़ का ‘भांचा’ (भांजा) बताया.उन्होंने कहा, “यह माता कौशल्या की धरती है और मैं यहाँ का भांचा हूँ, यहाँ मेरा पूरा अधिकार है.” उन्होंने कोरबा की जनता को ‘पागल’ कहकर संबोधित किया और उनके प्रेम को अद्भुत बताया। अपने संबोधन के दौरान पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने धर्मांतरण के मुद्दे पर अब तक का सबसे तीखा बयान दिया.आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय मिशनरियों की ओर इशारा करते हुएकहा |

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